लोहड़ी, उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध और उत्सवपूर्ण पर्व है, जो हर साल मकर संक्रांति से पहले मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है। लोहड़ी 2025 भी नई ऊर्जा, उमंग और परंपराओं के साथ लोगों के जीवन में उत्साह लाएगी। आइए जानते हैं लोहड़ी 2025 से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें और इस पर्व के शुभ मुहूर्त।
लोहड़ी 2025: तिथि और समय
साल 2025 में लोहड़ी का पर्व सोमवार, 13 जनवरी 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्यास्त के बाद लोहड़ी का मुख्य आयोजन किया जाता है।
- लोहड़ी पूजा का शुभ मुहूर्त:
- पूजा का समय: शाम 5:34 बजे से रात 8:12 बजे तक।
शुभ मुहूर्त के समय आग के चारों ओर परिवार और समुदाय के लोग इकट्ठा होकर पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हैं।
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लोहड़ी का महत्व
लोहड़ी केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और फसल के मौसम की शुरुआत का जश्न है। इसके प्रमुख महत्व इस प्रकार हैं:
- फसल कटाई का उत्सव:
- लोहड़ी रबी फसलों की कटाई का प्रतीक है, खासतौर पर गेहूं, गन्ना और सरसों की फसल। यह किसान परिवारों के लिए खुशी का दिन होता है।
- धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व:
- यह त्योहार दुल्ला भट्टी की कहानी से जुड़ा हुआ है, जो गरीबों के संरक्षक माने जाते थे।
- ज्योतिषीय महत्व:
- लोहड़ी मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाई जाती है, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। यह दिन मौसम में बदलाव और दिन के उजाले के बढ़ने का संकेत देता है।
लोहड़ी के ऐतिहासिक पहलू
- दुल्ला भट्टी की कहानी:
- लोहड़ी के गीत पंजाबी योद्धा दुल्ला भट्टी की कहानी का वर्णन करते हैं। दुल्ला भट्टी गरीब लड़कियों की मदद कर उन्हें उनकी शादी के लिए तैयार करते थे।
- सांस्कृतिक धरोहर:
- यह त्योहार पंजाबी संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है, जो समुदाय की एकता और सहयोग को दर्शाता है।

लोहड़ी के रीति-रिवाज और परंपराएँ
लोहड़ी का उत्सव विशेष रीति-रिवाजों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, जिनमें प्रमुख हैं:
- अग्नि पूजा:
- खुले मैदान में लकड़ियों और सूखे उपलों से बड़ी अग्नि जलाई जाती है। लोग अग्नि के चारों ओर घूमते हुए तिल, गुड़, मूंगफली और मक्के के दाने अर्पित करते हैं।
- पारंपरिक गीत और नृत्य:
- गिद्दा और भांगड़ा नृत्य करते हुए लोकगीत गाए जाते हैं। यह माहौल को और भी अधिक आनंदमय बना देता है।
- भोजन का महत्व:
- सरसों का साग, मक्के की रोटी, गजक, रेवड़ी और तिल के लड्डू जैसे स्वादिष्ट व्यंजन इस त्योहार की पहचान हैं।
- नई शुरुआत का जश्न:
- नवविवाहित जोड़ों और नवजात शिशुओं के लिए लोहड़ी का विशेष महत्व होता है। उनके लिए इस दिन खास आयोजन किया जाता है।
- बच्चों का योगदान:
- बच्चे घर-घर जाकर लोहड़ी के गीत गाते हैं और बदले में उन्हें गजक, मूंगफली, रेवड़ी और तिल दिया जाता है।
लोहड़ी 2025: पूजा विधि
लोहड़ी के दिन पूजा करने से सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूजा की विधि इस प्रकार है:
- संध्या के समय अग्नि तैयार करें।
- अग्नि में तिल, गुड़, मूंगफली और मक्के के दाने डालें।
- दुल्ला भट्टी की कहानी सुनें और पारंपरिक गीत गाएं।
- अग्नि की परिक्रमा करते हुए सुख-समृद्धि की कामना करें।
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लोहड़ी का संदेश
- प्रकृति के प्रति आभार:
- यह त्योहार प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और उसकी समृद्धि का जश्न मनाने का प्रतीक है।
- सामाजिक एकता:
- लोहड़ी हमें सामुदायिक सहयोग और एकता का महत्व सिखाती है।
- आशा और समृद्धि:
- लोहड़ी एक नई शुरुआत का प्रतीक है, जो भविष्य में सुख और समृद्धि का संदेश लाती है।
लोहड़ी और आधुनिक भारत
- शहरी उत्सव:
- आजकल शहरी इलाकों में भी लोहड़ी बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है।
- पारंपरिक और आधुनिकता का मेल:
- लोहड़ी के पारंपरिक रीति-रिवाजों में आधुनिक स्पर्श जुड़ गया है, जैसे डीजे पार्टी और सजावटी थीम।
निष्कर्ष
लोहड़ी 2025 का यह पर्व हमें अपनी परंपराओं और प्रकृति से जोड़ने का अनूठा अवसर प्रदान करता है। इस दिन की गई पूजा और अग्नि के चारों ओर की गई प्रार्थना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का आगमन होता है।
आप सभी को लोहड़ी 2025 की हार्दिक शुभकामनाएँ!