आमलकी एकादशी, जिसे आंवला एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक विशेष स्थान रखती है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और इस दिन आंवला वृक्ष की पूजा करने का विशेष महत्व होता है। 2025 में आमलकी एकादशी कब है? इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत पारण का समय क्या है? आइए जानते हैं विस्तार से।
आमलकी एकादशी 2025 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, आमलकी एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। 2025 में आमलकी एकादशी 9 मार्च, रविवार को पड़ रही है। इस दिन व्रत रखने और पूजन करने से भक्तों को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
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आमलकी एकादशी शुभ मुहूर्त 2025
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 8 मार्च 2025 को रात्रि 10:15 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 9 मार्च 2025 को रात 08:45 बजे
- पूजन का शुभ मुहूर्त: 9 मार्च 2025 को प्रातः 06:30 बजे से 11:00 बजे तक
- व्रत पारण का समय: 10 मार्च 2025 को प्रातः 06:15 बजे से 08:45 बजे तक
आमलकी एकादशी का महत्व
- यह व्रत मोक्षदायिनी एकादशी के रूप में जानी जाती है और पुण्य फल प्रदान करती है।
- मान्यता है कि इस दिन आंवला वृक्ष के नीचे भगवान विष्णु का वास होता है, इसलिए इसकी पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- इस दिन उपवास रखने से समस्त पापों का नाश होता है और मनुष्य को पुण्य की प्राप्ति होती है।
- इस एकादशी का पालन करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और समृद्धि आती है।
आमलकी एकादशी की पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करें।
- आंवला वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं और उसकी परिक्रमा करें।
- भगवान विष्णु को तुलसी, पंचामृत, फल, एवं विशेष रूप से आंवले का भोग अर्पित करें।
- इस दिन विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र एवं एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
- रात्रि जागरण करें और भजन-कीर्तन का आयोजन करें।
- अगले दिन व्रत पारण कर ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराएं।

आमलकी एकादशी व्रत कथा
प्राचीन कथा के अनुसार, एक समय की बात है, जब पृथ्वी पर राजा चित्ररथ धर्मप्रिय और भगवान विष्णु के परम भक्त थे। उनके राज्य में सभी लोग धर्मपरायण थे और भगवान की भक्ति में लीन रहते थे। एक दिन राजा चित्ररथ अपने राज्य के साथियों के साथ जंगल में शिकार के लिए गए। वहीं उन्होंने एक दिव्य महात्मा को आंवले के वृक्ष के नीचे तपस्या करते देखा।
राजा ने महात्मा से पूछा कि वे यहां क्यों तपस्या कर रहे हैं। तब महात्मा ने बताया कि यह स्थान अत्यंत पवित्र है और यहां भगवान विष्णु का वास है। उन्होंने राजा को आमलकी एकादशी व्रत का महत्व बताया और कहा कि इस दिन आंवला वृक्ष की पूजा करने और व्रत रखने से समस्त पापों का नाश होता है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।
राजा चित्ररथ ने महात्मा के कहे अनुसार इस व्रत को पूरे विधि-विधान से किया, जिससे उनके राज्य में सुख-शांति और समृद्धि का वास हुआ। तभी से यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए इसे विधिपूर्वक किया जाता है।
व्रत पारण का महत्व
व्रत करने के बाद उसका विधिपूर्वक पारण करना अत्यंत आवश्यक होता है। यदि व्रत का पारण सही समय पर न किया जाए, तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इसलिए 10 मार्च को शुभ मुहूर्त में व्रत पारण करें और जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा देकर इस व्रत का समापन करें।
निष्कर्ष
आमलकी एकादशी 2025 का व्रत भगवान विष्णु की कृपा पाने का एक विशेष अवसर है। आंवला एकादशी का पालन करने से पुण्य लाभ मिलता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। इस शुभ दिन पर नियमपूर्वक व्रत करें, भगवान विष्णु का पूजन करें और अपने जीवन को सुख-समृद्धि से भरपूर बनाएं।
आप सभी को आमलकी एकादशी की हार्दिक शुभकामनाएं!