मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार सूर्य देवता की पूजा, पवित्र नदियों में स्नान, और दान-पुण्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। मकर संक्रांति का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व है, क्योंकि यह सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश का प्रतीक है।
इस लेख में हम आपको बताएंगे मकर संक्रांति 2025 कब है, इस दिन के सही पूजन मुहूर्त, पूजा विधि, और इस शुभ दिन पर दान करने की परंपरा के बारे में।
मकर संक्रांति 2025 कब है?
तारीख:
मकर संक्रांति 2025 को मंगलवार, 14 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी।
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश (संक्रांति काल):
- सूर्योदय: सुबह 06:37 बजे
- पुण्य काल: सुबह 09:03 बजे से शाम 05:54 बजे तक
- महापुण्य काल: सुबह 09:03 बजे से 10:56 बजे तक
यह समय पूजा, पवित्र स्नान, और दान के लिए सबसे शुभ माना गया है।

मकर संक्रांति का महत्व
1. ज्योतिषीय महत्व
- मकर संक्रांति के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं।
- यह समय सकारात्मक ऊर्जा, नई शुरुआत, और कर्म का फल प्राप्त करने का संकेत देता है।
2. धार्मिक महत्व
- सूर्य देव की पूजा करने से स्वास्थ्य, धन, और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
- इस दिन गंगा, यमुना, और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है।
3. दान का महत्व
- मकर संक्रांति के दिन दान करने से पुण्य प्राप्त होता है।
- खासकर तिल, गुड़, कपड़े, और अन्न का दान अत्यंत शुभ माना जाता है।
मकर संक्रांति की पूजा विधि
1. स्नान और शुद्धिकरण
- सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदियों में स्नान करें या घर पर गंगाजल से स्नान करें।
- स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को साफ करें।
2. सूर्य देव की पूजा
- सूर्य देव को जल अर्पित करें।
- जल में तिल, चावल, और लाल फूल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें।
- सूर्य मंत्र का जाप करें:
“ॐ सूर्याय नमः”
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3. हवन और मंत्र जाप
- घर में हवन करें और सूर्य देव की आरती उतारें।
- गायत्री मंत्र और सूर्य मंत्र का 108 बार जाप करें।
4. प्रसाद वितरण
- तिल-गुड़ के लड्डू, खिचड़ी, और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाएं।
- इसे प्रसाद के रूप में परिवार और जरूरतमंदों में बांटें।
मकर संक्रांति पर दान करने की परंपरा
क्या-क्या दान करें?
- तिल और गुड़: यह शीत ऋतु में शरीर को गर्म रखने के साथ पुण्य फल देता है।
- खिचड़ी: चावल, दाल, और मसालों से बनी खिचड़ी का दान विशेष रूप से शुभ है।
- कपड़े: स्वच्छ और गरम कपड़े जरूरतमंदों को दान करें।
- धन और अन्न: गरीबों और ब्राह्मणों को धन और अन्न का दान करें।
दान करने का महत्व
- दान से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- इसे पुण्य प्राप्ति और सुख-समृद्धि का मार्ग माना जाता है।

मकर संक्रांति से जुड़ी परंपराएं
1. पतंगबाजी
गुजरात, राजस्थान, और महाराष्ट्र में पतंग उड़ाने की परंपरा है, जो इस त्योहार का आनंद और उत्साह बढ़ाती है।
2. तिल और गुड़ के व्यंजन
महाराष्ट्र और कर्नाटक में तिल और गुड़ से बनी मिठाइयां बनाई जाती हैं, जो आपसी प्रेम और मिठास का प्रतीक हैं।
3. खिचड़ी का भोग
उत्तर भारत में खिचड़ी बनाकर सूर्य देव को अर्पित की जाती है और इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
4. गंगा स्नान और तीर्थ यात्रा
हजारों श्रद्धालु गंगा सागर मेले में शामिल होते हैं और पवित्र स्नान करते हैं।
मकर संक्रांति 2025: शुभ फल प्राप्त करने के उपाय
- सूर्य मंत्र का जाप करें।
- जरूरतमंदों को भोजन और कपड़े दान करें।
- अपने माता-पिता और बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
- तिल-गुड़ से बनी मिठाइयों का सेवन करें और बांटें।
निष्कर्ष
मकर संक्रांति एक ऐसा त्योहार है, जो हमारे जीवन में सकारात्मकता, समृद्धि, और आध्यात्मिक उन्नति लाने का प्रतीक है। सही समय पर पूजा और दान करके आप अपने जीवन में शुभता और सुख-समृद्धि को आमंत्रित कर सकते हैं।
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