रंगों का त्योहार होली हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। साल 2025 में होली 14 मार्च, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इससे पहले 13 मार्च को होलिका दहन का आयोजन किया जाएगा।
होली 2025 का शुभ मुहूर्त
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त:
- प्रारंभ: 13 मार्च 2025, शाम 06:40 बजे
- समाप्ति: 13 मार्च 2025, रात 09:15 बजे
रंगों वाली होली:
- 14 मार्च 2025, प्रातःकाल से
होली पूजा विधि
- होलिका दहन की तैयारी: होलिका दहन से पहले एक पवित्र स्थान पर लकड़ी, उपले, सूखी घास, और अन्य पूजन सामग्री एकत्र करें। यह स्थान मंदिर या घर के पास किसी खुले मैदान में हो सकता है।
- पूजन सामग्री: रोली, अक्षत, नारियल, गंगाजल, फूल, मिठाई, कच्चा सूत, गेंहू और चने की बालियां, कपूर और दीपक।
- होलिका की पूजा: होलिका दहन से पूर्व होलिका की विधिवत पूजा करें। भक्तजन परिक्रमा कर गेंहू और चने की बालियां अर्पित करें और भगवान विष्णु की आराधना करें।
- होलिका दहन: शुभ मुहूर्त में होलिका दहन करें और भगवान नारायण से सुख-समृद्धि की कामना करें। अग्नि में सूखे नारियल और हवन सामग्री अर्पित करें।
- गुलाल और अबीर: अगले दिन रंगों की होली खेलें और सभी को प्रेम और भाईचारे का संदेश दें। इस दिन विशेष पकवान जैसे गुजिया, ठंडाई, मालपुआ, दही भल्ले और चिप्स का आनंद लें।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से होली 2025
साल 2025 में होली के दौरान ग्रहों की स्थिति विशेष महत्व रखती है। इस बार होली पर चंद्रमा कन्या राशि में रहेगा और सूर्य मीन राशि में स्थित होगा।
- मेष, सिंह, और धनु राशि के जातकों के लिए यह होली विशेष रूप से शुभ रहेगी।
- कन्या और मकर राशि के जातकों को इस समय संयम और धैर्य बनाए रखना चाहिए।
- होलिका दहन के समय मंत्रों का उच्चारण और विशेष पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आएगी।
भारत में क्षेत्रीय होली परंपराएं
- बरसाना लठमार होली: उत्तर प्रदेश के बरसाना में होली का विशेष आयोजन किया जाता है, जहाँ महिलाएं पुरुषों को लाठियों से मारती हैं, जिसे लठमार होली कहा जाता है।
- मथुरा और वृंदावन की होली: यह होली भगवान कृष्ण की नगरी में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। यहाँ फूलों, रंगों और भक्ति संगीत के साथ उत्सव का आयोजन होता है।
- शांतिनिकेतन की होली: पश्चिम बंगाल में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा शुरू की गई ‘बसंत उत्सव’ के रूप में होली मनाई जाती है। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
- हरियाणा की धुलंडी: इस दिन बहनें अपने जीजा को विशेष रूप से परेशान करने और मजाक करने का अवसर पाती हैं।
- बिहार की फगुआ: यहाँ ढोल-नगाड़ों के साथ पारंपरिक होली गीत गाए जाते हैं और भांग का विशेष महत्व होता है।
होली का महत्व
होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है। इस दिन भक्त प्रहलाद की भक्ति और भगवान विष्णु की कृपा का स्मरण किया जाता है।
इसके अलावा, होली समाज में आपसी मेल-जोल और प्रेम का संचार करता है। इस पर्व पर गिले-शिकवे मिटाने और नए रिश्ते मजबूत करने की परंपरा भी निभाई जाती है।
निष्कर्ष
होली 2025 का त्योहार 13 और 14 मार्च को मनाया जाएगा। यह एक ऐसा पर्व है जो प्रेम, सौहार्द और उल्लास का प्रतीक है। इस दिन पुराने गिले-शिकवे भूलकर सभी को रंगों के साथ खुशियां बांटनी चाहिए।
होली के इस शुभ अवसर पर अपने परिवार और मित्रों के साथ मिलकर आनंद उठाएं और सुरक्षित तरीके से इस पर्व को मनाएं।