हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत महत्व है। जया एकादशी को पापनाशिनी एकादशी के रूप में भी जाना जाता है। यह विशेष दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे विधिपूर्वक करने से सभी पापों का नाश होता है, मोक्ष की प्राप्ति होती है, तथा आर्थिक और मानसिक संकट दूर होते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी प्राप्त होती है।
क्यों खास है जया एकादशी ?
जया एकादशी का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि इसे पापनाशिनी एकादशी कहा जाता है। शास्त्रों में वर्णित कथाओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की भक्ति करने से सभी प्रकार के पाप समाप्त हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी माना जाता है जो जीवन में शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं।
जया एकादशी 2025 कब है?
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है और जया एकादशी को पापनाशिनी एकादशी भी कहा जाता है। यह एकादशी माघ मास के शुक्ल पक्ष की तिथि को आती है। वर्ष 2025 में जया एकादशी 8 फरवरी, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन की सभी परेशानियों का अंत होता है।
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भगवान विष्णु के प्रमुख मंत्र
भगवान विष्णु का बीज मंत्र:
ॐ बृं
भगवान विष्णु गायत्री मंत्र:
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात:
भगवान विष्णु का स्तुति मंत्र:
शांताकारं भुजगशयनं, पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं, मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं, योगिभिर्ध्यानगम्यम्, वन्दे विष्णुं भवभयहरं, सर्वलोकैकनाथम्।।
भगवान विष्णु का शक्तिशाली मंत्र:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
भगवान विष्णु की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥

जया एकादशी का शुभ मुहूर्त 2025
व्रत और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। सही समय पर पूजा करने से अधिक लाभ मिलता है।
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 7 फरवरी 2025, रात 09:26 बजे से
- एकादशी तिथि समाप्त: 8 फरवरी 2025, रात 08:15 बजे तक
- व्रत पारण (उपवास खोलने का समय): 9 फरवरी 2025, प्रातः 06:44 से 09:04 बजे तक
जया एकादशी का व्रत क्यों किया जाता है?
जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और उसे स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन में चल रही पैसों की तंगी समाप्त होती है और सुख-समृद्धि बढ़ती है।
जया एकादशी का व्रत के नियम
- एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- इस दिन अनाज, चावल और दाल का सेवन न करें। केवल फलाहार करें।
- भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी पत्र, फल, पंचामृत और पीले फूल चढ़ाएं।
- पूरे दिन विष्णु जी के मंत्रों का जाप करें और भजन-कीर्तन करें।
- इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें और सात्विक विचार रखें।
- द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान-दक्षिणा दें और फिर व्रत का पारण करें।
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जया एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा विधि
- प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजन स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- धूप, दीप, नैवेद्य और पुष्प चढ़ाकर विष्णु जी का आह्वान करें।
- श्री हरि विष्णु के मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का 108 बार जाप करें।
- श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें और भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करें।
- दिनभर व्रत और उपवास रखें, रात में भगवान विष्णु की कथा सुनें।
जया एकादशी 2025: विशेष लाभ
- इस व्रत को करने से सभी पापों का नाश होता है।
- मानसिक शांति और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।
- आर्थिक संकट दूर होकर समृद्धि आती है।
- भगवान विष्णु की कृपा से सुख-शांति बनी रहती है।
- मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्टों का अंत होता है।
निष्कर्ष:
जया एकादशी व्रत (Jaya Ekadashi Vrat) करने से न केवल आध्यात्मिक उन्नति होती है बल्कि धन और सुख-समृद्धि की प्राप्ति भी होती है। इस व्रत को पूरी श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए करना चाहिए ताकि भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त हो सके।
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