मकर संक्रांति, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है, और लाखों श्रद्धालु गंगा और अन्य पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित करते हैं।
इस लेख में हम चर्चा करेंगे कि मकर संक्रांति 2025 पर गंगा स्नान का महत्व क्या है और इसके पीछे छुपे धार्मिक, ज्योतिषीय और आध्यात्मिक पहलुओं को समझेंगे।
मकर संक्रांति 2025 कब है?
तारीख और समय:
मकर संक्रांति 2025 को मंगलवार, 14 जनवरी 2025 को मनाया जाएगा।
- पुण्य काल: सुबह 9:03 बजे से शाम 5:54 बजे तक
- महापुण्य काल: सुबह 9:03 बजे से 10:56 बजे तक
यह समय गंगा स्नान, पूजा, और दान के लिए सबसे शुभ माना गया है।
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मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का महत्व
गंगा स्नान, मकर संक्रांति के प्रमुख धार्मिक कर्मों में से एक है। इसे आत्मा की शुद्धि और पापों के प्रायश्चित के लिए अनिवार्य माना जाता है।
1. आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति
मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान करने से पवित्रता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह माना जाता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से जीवन के सभी पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर होता है।
2. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रभाव
इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। उत्तरायण को शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का समय माना जाता है। गंगा स्नान इस ऊर्जा को आत्मसात करने का माध्यम है।
3. पितरों की आत्मा की शांति
मकर संक्रांति पर गंगा स्नान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। साथ ही, पूर्वजों के लिए तर्पण और पिंडदान करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
4. कुंभ और गंगा सागर मेले का महत्व
गंगा स्नान का महत्व कुंभ मेले और गंगा सागर मेले से भी जुड़ा हुआ है। इन पवित्र मेलों में गंगा स्नान करने से दैवीय कृपा प्राप्त होती है।

मकर संक्रांति पर गंगा स्नान कैसे करें?
1. स्नान के लिए शुभ मुहूर्त चुनें
- स्नान के लिए पुण्य काल और महापुण्य काल का पालन करें।
- गंगा, यमुना, या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करें।
2. जल में तिल और कुश डालें
स्नान के जल में तिल और कुश डालने से इसका महत्व बढ़ जाता है।
3. मंत्र जाप करें
स्नान के दौरान निम्नलिखित मंत्र का जाप करें:
“ॐ गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।
नर्मदे सिंधु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।”
4. स्नान के बाद पूजा और दान करें
स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दें और तिल-गुड़, अन्न, और कपड़ों का दान करें।
गंगा स्नान से जुड़े धार्मिक लाभ
- पापों का प्रायश्चित:
गंगा स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और वह आध्यात्मिक रूप से शुद्ध हो जाता है। - पारिवारिक सुख और समृद्धि:
यह स्नान परिवार में सुख-शांति और समृद्धि लाने वाला माना जाता है। - स्वास्थ्य लाभ:
पवित्र जल में स्नान करने से शारीरिक और मानसिक शांति मिलती है। - देवताओं की कृपा:
गंगा स्नान करने से भगवान विष्णु, सूर्य देव और गंगा माता की कृपा प्राप्त होती है।
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मकर संक्रांति पर दान का महत्व
मकर संक्रांति पर दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। यह न केवल व्यक्ति के पापों को नष्ट करता है, बल्कि उसके जीवन में समृद्धि और खुशहाली भी लाता है।
क्या-क्या दान करें?
- तिल और गुड़: यह पवित्रता और ऊर्जा का प्रतीक है।
- खिचड़ी: अन्न का दान गरीबों को भोजन प्रदान करने का प्रतीक है।
- कपड़े: जरूरतमंदों को गरम कपड़े दान करें।
- धन और अन्य वस्त्र: धन और वस्त्र का दान परिवार के लिए सुख-समृद्धि लाता है।
निष्कर्ष
मकर संक्रांति 2025 केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति, पवित्रता, और सामाजिक सेवा का प्रतीक है। इस दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य करना न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मानसिक और भावनात्मक शांति के लिए भी लाभकारी है।
क्या आप इस मकर संक्रांति पर गंगा स्नान करने की योजना बना रहे हैं? अपने विचार और अनुभव हमारे साथ साझा करें!