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Gangaur 2025: गणगौर व्रत कब है? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

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गणगौर एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जिसे विशेष रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व माँ पार्वती और भगवान शिव के मिलन का प्रतीक है और विवाहित महिलाएं अपने सुहाग की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए गणगौर पूजा करती हैं।

Gangaur 2025 के अवसर पर आइए जानें गणगौर व्रत कब है, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और इस पर्व का महत्व।

गणगौर 2025: व्रत और पूजा की तारीख व शुभ मुहूर्त

गणगौर व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और माँ गौरी (पार्वती) की पूजा करती हैं

  • गणगौर 2025 व्रत की तिथि – [तारीख डालें]
  • तृतीया तिथि प्रारंभ – [समय]
  • तृतीया तिथि समाप्त – [समय]
  • गणगौर पूजन का शुभ मुहूर्त – [अभिजीत मुहूर्त या अन्य शुभ समय]

🔹 ध्यान दें: गणगौर पूजा का मुहूर्त स्थान विशेष के अनुसार भिन्न हो सकता है। अपने क्षेत्र के अनुसार पंचांग से शुभ समय की पुष्टि करें।

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गणगौर व्रत का महत्व (Significance of Gangaur 2025)

गणगौर व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य का प्रतीक है।

1. देवी पार्वती का आशीर्वाद

गणगौर माता को देवी पार्वती का स्वरूप माना जाता है, जो अपने कठोर तप से भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करती हैं। यह व्रत पति-पत्नी के प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।

2. वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि

इस दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र और सुखद दांपत्य जीवन की कामना करती हैं, जबकि कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।

3. राजस्थान और मध्य प्रदेश में विशेष महत्त्व

गणगौर उत्सव राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। राजस्थान में विशेष रूप से जयपुर, उदयपुर, जोधपुर और बीकानेर में यह त्योहार भव्य रूप में मनाया जाता है।

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गणगौर व्रत और पूजा विधि (Gangaur 2025 Vrat and Puja Vidhi)

गणगौर व्रत को विधिपूर्वक करने से माँ गौरी की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन महिलाएं विशेष पूजा-अर्चना करती हैं और उत्सव धूमधाम से मनाती हैं।

1. उपवास (Fasting Rituals)

  • सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं निर्जला या फलाहारी व्रत रखती हैं।
  • कुछ क्षेत्रों में 16 दिनों तक गणगौर व्रत रखने की परंपरा है, जिसमें चैत्र कृष्ण पक्ष से इसकी शुरुआत होती है।

2. गणगौर माता की पूजा

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद महिलाएं मिट्टी की गणगौर माता की मूर्ति बनाती हैं और उनकी श्रृंगार सामग्री से पूजा करती हैं
  • गणगौर माता को मेहंदी, कुमकुम, चूड़ी और सुहाग की अन्य वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं
  • गुलाल और फूलों से माता की विशेष आरती की जाती है

3. लोकगीत और परंपराएं

  • इस दिन महिलाएं पारंपरिक लोकगीत गाती हैं और समूह में गणगौर माता की कहानियां सुनती हैं
  • सुहागन स्त्रियां गणगौर माता के आगे जल अर्पण करती हैं

4. गणगौर विसर्जन (Gangaur Visarjan)

  • व्रत का समापन गणगौर माता की मूर्ति को जल में विसर्जित करने से होता है
  • इस अवसर पर बड़ी शोभायात्राएं (Gangaur Procession) निकाली जाती हैं, जो विशेष रूप से जयपुर, उदयपुर और जोधपुर में प्रसिद्ध हैं
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गणगौर व्रत का विशेष महत्व राजस्थान और मध्य प्रदेश में

  • राजस्थान:
    • जयपुर: यहाँ गणगौर महोत्सव पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है।
    • उदयपुर: झीलों की नगरी में गणगौर उत्सव राजशाही अंदाज में मनाया जाता है
  • मध्य प्रदेश:
    • इंदौर और उज्जैन में यह त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है

निष्कर्ष (Conclusion)

Gangaur 2025 एक आस्था, प्रेम और पारिवारिक सौभाग्य का पर्व है। इस व्रत को रखने से पति-पत्नी के रिश्ते में मजबूती आती है और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है

यदि आप भी गणगौर व्रत 2025 रखने जा रहे हैं, तो अपने अनुभव और परंपराओं को हमारे साथ साझा करें! गणगौर माता आपकी मनोकामनाएं पूरी करें! 🙏💐

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