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विनायक चतुर्थी 2025: विनायक चतुर्थी पर पढ़ें ये कथा, जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

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विनायक चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे भक्तगण श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से सभी विघ्न और बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। हिंदू धर्म में गणेश जी को प्रथम पूज्य माना जाता है, और हर शुभ कार्य से पहले उनकी आराधना की जाती है।

विनायक चतुर्थी का महत्व

विनायक चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन विधिपूर्वक गणपति जी की पूजा-अर्चना करने से भक्तों को समृद्धि, सुख, और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह की चतुर्थी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है, लेकिन विशेष रूप से माघ और भाद्रपद माह की चतुर्थी को अधिक महत्व दिया जाता है। विनायक चतुर्थी 2025 में 3 मार्च को मनाई जाएगी।

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विनायक चतुर्थी 2025 का शुभ मुहूर्त

  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 02 मार्च 2025, रात 09:01 बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 03 मार्च 2025, रात 06:02 बजे
  • पूजा का शुभ मुहूर्त:

रवि योग – सुबह 04 बजकर 29 मिनट से 06 बजकर 43 मिनट तक (4 मार्च)
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 29 मिनट से 03 बजकर 16 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 20 मिनट से 06 बजकर 45 मिनट तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 08 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक।

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विनायक चतुर्थी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने अपने उबटन से एक बालक का निर्माण किया और उसे द्वारपाल के रूप में नियुक्त कर दिया। जब भगवान शिव आए और द्वार पर रोक दिए गए, तो बालक ने उन्हें अंदर जाने से मना कर दिया। इस पर भगवान शिव ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से बालक का सिर काट दिया। माता पार्वती को जब इस घटना का पता चला, तो उन्होंने शिव जी से अपने पुत्र को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया।

भगवान शिव ने आदेश दिया कि उत्तर दिशा में सबसे पहले जो जीव मिले, उसका सिर बालक के धड़ पर लगा दिया जाए। सबसे पहले एक हाथी मिला, और उसी का सिर बालक के धड़ पर लगाया गया। इस प्रकार भगवान गणेश का जन्म हुआ और वे प्रथम पूज्य देवता बन गए।

विनायक चतुर्थी पूजा विधि

  1. स्नान और संकल्प:
    • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और गणपति पूजन का संकल्प लें।
  2. गणेश प्रतिमा स्थापना:
    • भगवान गणेश की प्रतिमा को एक पवित्र स्थान पर स्थापित करें।
  3. पूजन सामग्री:
    • रोली, मोली, अक्षत, दूर्वा, फूल, लड्डू, पंचामृत, सुपारी, नारियल, गंगाजल आदि।
  4. मंत्र जाप:
    • गणपति अथर्वशीर्ष, गणेश स्तोत्र, या गणेश चालीसा का पाठ करें।
  5. आरती और भोग:
    • घी का दीप जलाकर गणेश जी की आरती करें और लड्डू का भोग लगाएं।
  6. व्रत और दान:
    • दिनभर व्रत रखें और अंत में जरूरतमंदों को अन्न एवं वस्त्र दान करें।

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विनायक चतुर्थी का फल

जो भी श्रद्धालु इस दिन भगवान गणेश की आराधना करता है, उसकी सभी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। व्यापारी, विद्यार्थी और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

निष्कर्ष:

विनायक चतुर्थी का पर्व आस्था, भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है। भगवान गणेश के पूजन से न सिर्फ जीवन में शांति और सुख-समृद्धि आती है, बल्कि सभी कार्यों में सफलता भी प्राप्त होती है। इस विनायक चतुर्थी 2025 पर विधिपूर्वक पूजा कर भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करें।

विनायक चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ!

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